FILM INDUSTRY: EARNING MOVIE PROCESS
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जैसा कि आप जानते है फिल्म इंडस्ट्री का कारोबार इस समय कितना फल फूल रहा है। चाहे वो बॉलीवुड हो या टॉलीवुड। बहुत सारी क्षेत्रीय भाषा की फिल्मे भी अच्छा खासा बिज़नेस कर लेती है। बड़ी मूवी की कारोबार जैसे बॉलीवुड ,हॉलीवुड या टॉलीवुड की फिल्मे भी करोड़ो रूपये मात्र हफ्ते भर में कमा लेती है। तो इसमें कैसे इतने बड़े लेवल पर मूवीज को हर जगह पंहुचा के पैसे कमाते है ,आईये देखते है -
किसी भी फिल्म को बनाने में बहुत लोगो का हाथ होता है और बहुत सारी स्टेज होती है। किसी मूवी को बनाने में बजट का बहुत अहम् रोल होता है। तो इसको कई स्टेप में बाट के काम किया जाता है।
MOVIE BUDGET
1. DEVELOPMENT :-किसी भी मूवी का सबसे पहला सेक्शन SCRIPT WRITING का होता है। फिल्म की डायलॉग ,कहानी आदि सब इसी सेक्शन में आते है। इसको मूवी का बेस भी मानते है।
2. PREPODUCTION :- इस सेक्शन में पूरी फिल्म की टीम बनायीं जाती है जिसमे फिल्म की हीरो, हीरोइन के साथ फिल्म की पूरी CAST बनायीं जाती है इसी सेक्शन में फिल्म का लोकेशन भी तय किया जाता है।
3. PRODUCTION :- इस में प्लानिंग के तहत शूटिंग इस सेक्शन में की जाती है फिल्म बनाने से लेकर ख़त्म होने तक सारे काम इसमें ही किये जाते है। तो इस सेक्शन में फिल्म का सबसे बड़ा काम होता है।
4 . POST PRODUCTION :- शूटिंग ख़त्म होने के बाद एडिटिंग , साउंड इफ़ेक्ट,डिजाइनिंग आदि का काम होता है जो कि इस सेक्शन में होता हैं।
ये चारो सेक्शन का काम ख़त्म होने के बाद फिल्म बन के कम्पलीट हो जाती है इस चारो सेक्शन के दौरान होने वाले खर्च (पूरी कास्ट का , लाइटिंग , तकनीशियन आदि ) का ज़िम्मा PRODUCER का होता है। जो PRODUCER इस पर पैसे लगाता है वो कैसे कमाता है ये देखते है -
दरअसल PRODUCER की कमाई बहुत लम्बी प्रोसेस से होती है। ये बिज़नेस MODEL SUPPLY CHAIN पर काम करता है।
जो दो तरह से होता है -1 . इस केस में PRODUCER , खुद ही डिस्ट्रीब्यूटर का काम भी करते है। ऐसे फिल्म में अक्सर बड़े स्टार काम करते है जिससे PRODUCER को डिस्ट्रीब्यूटर के काम में रिस्क नहीं रहता है। (जैसे -यशराज ,धर्म प्रोडशन आदि )
2. इस केस में PRODUCER इंडिविजुअल काम करते है और फिल्म,डिस्ट्रीब्यूटर को दे देते है और उससे अपना लाभ कमा लेते है। इस केस में हानि की संभावना PRODUCER को काम रहता है क्योंकि PRODUCER पहले ही डिस्ट्रीब्यूटर को बेच के अपना पैसा निकल लेता है। इसमें अगर मूवी फ्लॉप हो जाती है तो उसका हानि डिस्ट्रीब्यूटर को उठाना पड़ता है।
आजकल सबसे ज्यादा फिल्म बनाने के बाद ADVERTISEMENT पर जोर रहता है और एक अच्छी मूवी पर करोड़ो रूपये खर्च हो जाता है। मार्केटिंग और प्रोमोशन का खर्च भी डिस्ट्रीब्यूटर को ही देना पड़ता है क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर , PRODUCER से मूवी बनने के बाद ही ले लेता है। अब इसके बाद से डिस्ट्रीब्यूटर को पैसे कमाने की बारी आती है। सबसे पहले फिल्म के सॅटॅलाइट राइट , म्यूजिक राइट्स को बेचता है (सॅटॅलाइट राइट्स - फिल्म को TV पर दिखाने के लिए मूवी को खरीदना ) . डिस्ट्रीब्यूटर का सबसे बड़ा काम फिल्म को थिएटर में रिलीज़ करवाना होता है , इसके लिए सब-डिस्ट्रीब्यूटर को फिल्म बेच देते है और वो देश के विभिन्न शहरों के थिएटर के जो मालिक होते है उनको बेच देते है अब जब फिल्म रिलीज़ होती है और टिकट से जो पैसा आता है उसे कहते है GROSS INCOME . इस GROSS INCOME में से टैक्स निकालने के बाद जो NET INCOME बचता है उसको सब-डिस्ट्रीब्यूटर के साथ शेयर करता है। और इन RATIO में पैसे डिस्ट्रीब्यूट होते है।
SINGLE SCREEN के लिए -25 : 75
MULTIPLEX SCREEN के लिए - WEEK 1 (50 :50 )
WEEK 2 (60 :40 )
WEEK 3 (70 :30 )
इसके बाद WEEK 3 के जैसा ही RATIO रहता है। (थिएटर :डिस्ट्रीब्यूटर )
इन सब में डिस्ट्रीब्यूटरका शेयर होता है।
अगर यही पर फिल्म के टिकट नहीं बिकते है तो थिएटर OWNER को LOSS होता है और डिस्ट्रीब्यूटर को भी पैसे नहीं मिल पाते है और फिल्म फ्लॉप हो जाती है।
जैसे फिल्म HINDI MEDIUM -
माना फिल्म का बजट - 20cr
PRODUCER ने डिस्ट्रीब्यूटर को फिल्म बेचा 40 cr में। (यहाँ पर PRODUCER को 20 cr का फायदा हुआ )
मान लीजिए यह पर डिस्ट्रीब्यूटर ने प्रमोशन पर खर्च किये - 10 cr (डिस्ट्रीब्यूटर के लिए टोटल खर्च हो गया 50 cr )
डिस्ट्रीब्यूटर ने सॅटॅलाइट राइट्स,म्यूजिक राइट्स को माना 15 cr में बेच दिया। (डिस्ट्रीब्यूटर यहाँ पर 15 cr रिकवर किया )
डिस्ट्रीब्यूटर ने सब -डिस्ट्रीब्यूटर को और उसने थिएटर मालिक को फिल्म बेच दिया। अगर थिएटर से GROSS INCOME 100 cr का हुआ। तो 28% GST लगाने के बाद NET INCOME हुआ 78 cr .
अगर सिंगल स्क्रीन की बात करें (25 :75)
तो थिएटर को -19. 5 cr ,व डिस्ट्रीब्यूटर को 58. 5 cr
डिस्ट्रीब्यूटर की टोटल इनकम हुयी {58.5+15-40-10}=23.5cr (एक फिल्म से प्रॉफिट )
तो डिस्ट्रीब्यूटर की प्रॉफिट को देख कर ही फिल्म का हिट या फ्लॉप तय किया जाता है। ऐसे ही फिल्म इंडस्ट्री का बिज़नेस मॉडल काम करता है।
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